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यह किसी भी गतिविधि को ध्यान में बदलने का मुख्य सिद्धांत है। हम ज्यादातर कार्यों को यांत्रिक रूप से करते हैं। डी-ऑटोमेटाइज करने का अर्थ है इन कार्यों में पूर्ण, क्षण-दर-क्षण की जागरूकता लाना।
एक आदतन गतिविधि चुनें (जैसे धूम्रपान करना, खाना खाना, या चलना)... इसे धीरे से और पूरी जागरूकता के साथ करें... हर कदम का ध्यान रखें: जेब से पैक निकालना, टैप करना, सूंघना, जलाना, पहला कश लेना... कार्य को इतनी सचेतन रूप से देखें कि उसकी स्वाभाविक प्रकृति प्रकट हो जाए... यह सिद्धांत किसी भी आदतन कार्य पर लागू किया जा सकता है।